धर्म की आढ़ में

धर्म की आढ़ में उल्लु सीधा करना

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Prem Bajaj
Prem Bajaj 27 Dec, 2020 | 1 min read

क्यों हम धर्म की आढ़ लेकर एक दूजे पर तंज कस रहे हैं । इश्वर ने तो धर्म नहीं बनाया , इश्वर ने इन्सान बनाया , सुन्दर प्रकृति प्रदान की इन्सान को , मनोरंजन के लिए पशु पक्षी , जीवन निर्वाह के पेड़ पौधे , फूल- फल सब खाद्ध सामग्री प्रदान की । ………

# लेकिन वाह ये इन्सान तेरी फितरत निराली , इश्वर की रचना में भी तुने खलल डाली #

क्यों एक जीव ही दूसरे जीव का दुश्मन बन बैठा है ,जीव ही जीव को मार कर खा रहा है । क्यों इन्सान ने प्रकृति को इतना हताश कर दिया कि आज प्रकृति भी हमें हमारे किए का फल दे रही है ।

हमारी जिस संस्कृति और धर्म की मिसालें दिया करता था संसार , आज वो संस्कृति, वैष्विक एकता , दया , धर्म क्षीण होते नज़र आते हैं , हमारा धर्म संक्रमित हो चुका है ।

 सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो सभी अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं , कुछ असामाजिक तत्व झूठे -सच्चे और उत्तेजनाजनक संदेश एक से दूसरे तक पहुंचाकर हिन्दु- मुस्लिम का भेद बता कर लड़ा रहे हैं आपस में ।

समाज आज दूसरों की कुरितियों पर आधारित हो कर सोच रहा है ये नहीं समझता कि जिस संक्रमण से हम संक्रमित हो रहे हैं उसकी कोई मंजिल नहीं ।

जीवन में कभी सुख , कभी दु:ख , कभी आशा तो कभी निराशा आते ही हैं , इसका मतलब ये नहीं कि हम अपनी कमियों को दूसरे के मत्थे मढ़ दें ।

 तो आइये समाज से इस धार्मिक और सामाजिक संक्रमण को जड़ से उखाड़ फेंके और मिल कर इन्सान का इन्सान से नाता निभाए , प्रकृति को मान लें , पशु -पक्षीयों को प्यार दें ।

जय हिन्द , जय भारत 🙏

प्रेम बजाज

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Prem Bajaj

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Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

  • Bharat Bhushan Pathak · 1 year ago last edited 1 year ago

    बहुत ही हृदय स्पर्शी भाव आदरणीया

  • Prem Bajaj · 1 year ago last edited 1 year ago

    बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏🌹😊

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