यादें

यादें तेरी

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Prem Bajaj
Prem Bajaj 02 Jan, 2021 | 1 min read

आती हैं याद वो तेरी बातें , सताती हैं मुझे बहुत दूरियां,

करते रहा करो हम से मुलाकातें

याद आते हैं वो लम्हे , वो मुलाकातें , मिला करते थे हम जब कभी,  

होते थे बरसातों के दिन कभी, कभी होती थी चांदनी रातें

वो छतों पर आकर हम दोनों किया करते थे इशारों-इशारों में बातें ।


मेरी धड़कन में आज भी धड़कते हैं वो लफ्ज़ तेरी यादों के , दिया बाती सा था

प्यार हमारा हम बन गए हैं दरिया के किनारे हर पल होती हैं ग़मों की बरसाते ।


तुम्हें तो प्यार था फूलों से तुम क्या जानों कांटों के दर्द की बातें

तुमने तो बसा लिया अपना जहां हम बहाते हैं अश्क करके याद तुम्हारी बातें ।


उन कुछ लफ्जों की यादें ही तो हैं जो हमारे जीने का सहारा हैं बन जाते

काश तुम भी होते यादों से ,  बिन बुलाए ही चले आते ।


प्रेम बजाज

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Prem Bajaj

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