prem bajaj

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मैं प्रेम बजाज ( P.B.) एक लेखिका हूं , मुझे लिखने और दोस्त बनाने का शौंक है ।

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ये दिल
देख कर तुम्हें संभल जाता है ये दिल हो जाओ ओज़ल तुम तो डर जाता है ये दिल। कोई अनजान पल में बन जाता है कैसे-कैसे खेल हमें दिखाता है ये दिल। कब - कब आते हैं वो ख्यालों में मेरे मीठी छुअन का एहसास दिलों के साथ। सहरा में जब भी बैठती हूँ उन्हें उनके याद में बहुत तड़पाता ये दिल बैठ। आया जो रखते उनकी बदमाशियों का अकेले में भी तो मुस्कुराता है ये दिल। ना जाना कभी छोड़कर मुझको सनम तुम बिन अकेले बहुत घबराता ये दिल। ना कीजे यूं गुफ्तगू किसी ग़ैर से जाने कसम से हमें बहुत जलाता है ये दिल। शबे- हिजरा में करवटें बदलते रहते हैं इस तनाव को आग लगाता ये दिल। यूं ना तड़पाया मत # प्रेम # को जालिम जुदाई-ए-ग़म में दर्द से है कराहता ये दिल।

Paperwiff

प्रीमियरबाज़ द्वारा

मोहब्बत

30 Sep, 2020