ये जीवन है
वह जाड़े की एक सुबह थी
सब और कोहरा छाया था
कोई नहीं दीखता था
सन्नाटा सा छाया था
उस जाड़े की उस सुबह में
दो छोटे-छोटे बच्चे थे
नादान थे उम्र से लेकिन
हिम्मत के वह पक्के थे
फूलों पर ओस के जैसे
उनके नैना चमकीले थे
घर चलाने की खातिर
वह काम पे अपने निकले थे
Paperwiff
by namratapandey