कृपा
वह जो
सदैव शब्दों की सीमाओं से परे रहा ,
असंभव है बंधना उसका किसी विशेष परिधि में,
अनदेखा सा
पर हर बार महसूस किया हमने उसे
ठहरी सांसों में,,दहकते दुःखों में। ,
टूटते भरोसे के बीच भी जो थामे रहा
अपनी कृपाओं से,
वह ईश्वर है,,हां वह ईश्वर है !!
Paperwiff
by namitagupta