MUKESH BISSA
MUKESH BISSA 09 Apr, 2026
इंतज़ार
इंतज़ार इंतज़ार कोई पल भर की बात नहीं, ये तो जैसे समय की लंबी साँस है, जो हर धड़कन के साथ चलती है, और हर ठहराव में छुपी एक आस है। कभी ये शाम के साये में ढलता है, कभी रात की चुप्पी में जागता है, कभी सुबह की किरणों से पूछता है— “क्या आज वो आएगा…?” और हर जवाब में खुद को ही पाता है। इंतज़ार में एक अजीब सी खामोशी होती है, जो शब्दों से कहीं ज्यादा बोलती है, होंठ चुप रहते हैं, मगर आँखें हर रास्ते को टटोलती हैं। वो जो नहीं है पास, उसी की मौजूदगी सबसे गहरी होती है, उसके कदमों की आहट भी हवा में कहानी सी बहती होती है। कभी ये मीठा लगता है— जैसे कोई सपना पल रहा हो, कभी ये चुभता है— जैसे कोई अधूरा ख्वाब जल रहा हो। इंतज़ार सिखाता है सब्र, और सब्र में छुपा होता है इम्तिहान, जो जितना गहरा इंतज़ार करता है, वो उतना ही सच्चा होता है इंसान। कभी ये प्रेम की परिभाषा बन जाता है, तो कभी विरह का गीत, कभी ये दिल को मजबूत करता है, तो कभी कर देता है अतीत। पर सच यही है— इंतज़ार कभी खाली नहीं जाता, या तो वो मिल जाता है जिसका था, या इंसान खुद को पा जाता। और तब समझ आता है— इंतज़ार कोई सज़ा नहीं, बल्कि वो रास्ता है, जहाँ चलते-चलते इंसान अपने भीतर के सबसे सच्चे हिस्से से मिलता है।

Paperwiff

by mukeshbissa

09 Apr, 2026

इंतज़ार

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.