जब तुम नहीं सुनते
"बड़ी अज़ीब है दास्ताँ ऐ दिल
कहे न कहे असमंजस में है दिल
बिन कहे वो समझते भी तो नही
कुछ कहे बिन हम रहे भी तो नहीं।
बरसती स्याही बूंदे ,ये अंधेरी रात
उसको तकती नजरें , उलझते मेरे जज़्बात।
एक पल में उसे छू लू वो बहती हवा
वो मधुर धुन सी, रब की प्यारी रज़ा
मैं बेताब सा...बयाँ अब किसे करूँ ?
कुछ कहे बिन तुम बताओ कैसे रहूँ ?
बड़ी अजीब है...गुफ़्तगू ऐ दिल
किसे कहे ..किसे कहे
बड़ी रंजिश में है दिल।"
Paperwiff
by manojbishnoi