HARISHANKAR SONI
HARISHANKAR SONI 25 Feb, 2021
मैं आउंगा कब…।
मैं आऊंगा जब दरमियाँ फांसले हमारे कम होंगे जा रहे होंगे जो डगर महादिल के कम अलमस्त सफर होंगे। तय करेंगे ये दूरी अक्सर जब साथ होगी और मैं तब हम भी आपकी संगति करेंगे। मैं आऊंगा जब रास्ते अँधेरे होंगे जब एक ही जलेगा रौनी का, वो रौनी ही तुम्हारा या मेरी सोनेरे होंगे। तू अकेले मत जाना ओ मेरे यारा, ठोकर लग जाएगी अभी अँधेरा है साथ निकल जाएगी जब रौशनी के सवेरे होंगे। ओ मेरे यारा ... इंतज़ार करते हुए, कभी ढलेगी ये ज़ुल्मतों की रात कभी तो कम अँधेरे होंगे। कम ठहरना किसी ओट पर चल जाएगा जब कम अँधेरे होंगे। जिद मत कर समय नहीं नश्वरता भूल गए जीवन की। अरे समय भी तो लौट के नहीं आता कभी, फिर हम क्यों उसकी ज़या होने की फिक्र करें।

कागज़ की चट्टान

हरिशंकरसोनी द्वारा

25 Feb, 2021

मैं आऊंगा जब रास्ते अँधेरे होंगे जब एक ही दिया जलेगा रौशनी का, वो रौशनी ही तेरे मेरे सवेरे होंगे।

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