dr.kanhaiya lal Gupta
12 Feb, 2026
शीतलता
शीतलता सिर्फ पेड़ पौधों में ही नहीं वाणी में भी होनी चाहिए,
समाज के प्रदूषण को समाप्त करने का कार्य मधुर वचन है।
आज समाज का प्रत्येक प्राणी कठोरता कर्कशता से व्याकुल है,
आवश्यकता है मधुर शीतलता के प्रचार प्रसार करने की,
तप्त दग्ध हृदय के तारों को जोड़ने की झंकृत करने की,
जैसे शीतलता संसार को आकर्षित करती रहती है,
शीतलता पूर्ण वाणी मन मयूर को थिरकाती रहती हैं,
शीतलता से तन मन वातावरण सभी आकर्षित है।।
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by drkanhaiyalalgupta
12 Feb, 2026
शीतलता - ठंडा
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