अजीब दुनियां हैं

अजीब दुनियां हैं

Originally published in hi
Reactions 1
276
Dakshal Kumar Vyas
Dakshal Kumar Vyas 27 Apr, 2022 | 0 mins read
Workers Youths Interpreter World' India

गुरूर था मुझे जो

इस अभिमानी दुनियां ने तोड़ दिया

प्यार से देखा इस विश्व को

नफरत में बदल दिया

अभी उड़ना शुरू ही किया था

लालची लोगो ने डोर ही काट दि

हाथ में खिलौने देकर

जब आदत सी पड़ गई , छीन लिया उसे

ज़मीन से शुरू किया

ज़मीन पर आ गिरा हूं

गिरने से डर नहीं है

अपनी वज़ह से कोई गिरे मंजुर नहीं।


दक्षल कुमार व्यास

1 likes

Published By

Dakshal Kumar Vyas

dakshalkumarvyas

Comments

Appreciate the author by telling what you feel about the post 💓

Please Login or Create a free account to comment.