Pictureprompt-24
picture prompt no.24 पर प्रेषित मेरी कविता स्वरचित, मौलिक, अप्रकाशित एवंअप्रसारित शीर्षक"ध्यान मग्न मन" ध्यान मग्न होकर मैं सोचूं- कितना गहन समंदर है मन, सुख दु:ख के सारे लम्हों को- सहज समेटे रहता है मन. 'गम के आंसू' खारा पानी- बांचें हरदम दु:खद कहानी, तट पर लहरें पटक रहीं सिर- अविराम है उनकी बानी. भू ,नभ,जल,वायु और आग- पंचतत्व से जागें भाग, इस नियति को नमन करूं गुनगुनाए संग जीवन-राग. ____ रचयिता- डॉ.अंजु लता सिंह गहलौत,नई दिल्ली (सर्वाधिकार सुरक्षित) ई-मेल-- anjusinghgahlot@gmail.com दूरभाष--9868176777

Paperwiff

by anjugahlot

23 Nov, 2023

अथाह जलराशि के समक्ष ध्यानमग्न युवती की तस्वीर

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