कर्मयोग सिद्धांत

Aman G Mishra
01 Oct, 2019 • 1 min read min read • hi
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कर्मयोग सिद्धांत

कर्म-योग सिद्धांत:विभिन्न भाषाओं में


श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कर्म-योग सिद्धांत को तीसरे,चौथे एवं पांचवे अध्याय में बहुत ही प्रमुखता से समझाया है। गीता के ही इस श्लोक को हम विभिन्न भाषाओं में समझने का प्रयास करेंगे, ये श्लोक सम्पूर्ण कर्म सिद्धांत का सार है।


कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषुकदाचन ।

माकर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोस्त्वकर्मणि ।।


(...श्लोक संस्कृत भाषा में:भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 47 से)


श्लोक का सार हिंदी भाषा में:- भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के माध्यम से सम्पूर्ण मानव जाति को यह सीख देते हैं कि हे! मनुष्य तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म करने में है।तुम्हे फल की चिंता नही करना चाहिए,कर्मों के फल की चिंता करने से व्यर्थ ही अकर्मण्यता बढ़ती है जिसके कारण समय और जीवन दोनों ही व्यर्थ हो जाते हैं। 


श्लोक का सार तमिल भाषा में:-அர்ஜுனன் மூலம் ஸ்ரீ கிருஷ்ணர் முழு மனிதர்களுக்கும் கற்றுக்கொடுக்கிறார் ஏய்! செயல்களைச் செய்வதில் மட்டுமே மனிதன் உங்கள் உரிமை. நீங்கள் பழத்தைப் பற்றி கவலைப்படக்கூடாது, அது உங்கள் கட்டுப்பாட்டில் இல்லை. நீங்கள் கர்மாவை மட்டுமே செய்ய முடியும், எனவே கர்மாவின் பலன்களைப் பற்றி கவலைப்படுவதை விட்டுவிடுங்கள். செயல்களின் பலன்களைப் பற்றி கவலைப்படுவது பயனற்ற செயலற்ற தன்மைக்கு வழிவகுக்கிறது, இதன் காரணமாக நேரமும் வாழ்க்கையும் வீணாகின்றன.

 

श्लोक का सार उर्दू भाषा में:-ارجن کے ذریعہ لارڈ شری کرشنا پوری انسانیت کو یہ تعلیم دیتے ہیں کہ ارے! انسان صرف اعمال کرنے میں آپ کا حق ہے آپ کو پھلوں کی فکر نہیں کرنی چاہئے ، یہ آپ کے اختیار میں نہیں ہے۔ آپ صرف کرما ہی کرسکتے ہیں ، لہذا کرما کے پھلوں کی فکر کرنے سے دستبردار ہوجائیں۔ اعمال کے ثمرات کے بارے میں فکر کرنا بیکار غیر فعال ہونے کا باعث بنتا ہے ، جس کی وجہ سے وقت اور زندگی دونوں ضائع ہوجاتے ہیں۔

 


श्लोक का सार तेलुगू भाषा में:-అర్జునుని ద్వారా శ్రీ కృష్ణుడు మొత్తం మానవాళికి బోధిస్తాడు హే! పనులు చేయడంలో మాత్రమే మనిషి మీ హక్కు. మీరు పండు గురించి ఆందోళన చెందకూడదు, అది మీ నియంత్రణలో లేదు. మీరు కర్మ మాత్రమే చేయగలరు, కాబట్టి కర్మ ఫలాల గురించి చింతిస్తూ ఉండండి. పనుల ఫలాల గురించి ఆందోళన చెందడం వ్యర్థమైన నిష్క్రియాత్మకతకు దారితీస్తుంది, దీనివల్ల సమయం మరియు జీవితం రెండూ వృధా అవుతాయి.

 


श्लोक का सार अरबी भाषा में:-الرب شري كريشنا من خلال أرجونا يعلم البشرية كلها أن مهلا! الرجل محق في أعمالك فقط ، ولا يجب أن تقلق بشأن الثمرة ، فهي ليست تحت سيطرتك. يمكنك أن تفعل فقط الكرمة ، لذلك التخلي عن القلق حول ثمار الكرمة. القلق بشأن ثمار الأفعال يؤدي إلى خمول عديم الجدوى ، بسبب تبديد الوقت والحياة.

 


श्लोक का सार कन्नड़ भाषा में:-ಅರ್ಜುನನ ಮೂಲಕ ಭಗವಾನ್ ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣನು ಇಡೀ ಮಾನವಕುಲಕ್ಕೆ ಕಲಿಸುತ್ತಾನೆ ಹೇ! ಕಾರ್ಯಗಳನ್ನು ಮಾಡುವುದರಲ್ಲಿ ಮಾತ್ರ ಮನುಷ್ಯ ನಿಮ್ಮ ಹಕ್ಕು.ನೀವು ಹಣ್ಣಿನ ಬಗ್ಗೆ ಚಿಂತಿಸಬಾರದು, ಅದು ನಿಮ್ಮ ನಿಯಂತ್ರಣದಲ್ಲಿಲ್ಲ. ನೀವು ಕರ್ಮವನ್ನು ಮಾತ್ರ ಮಾಡಬಹುದು, ಆದ್ದರಿಂದ ಕರ್ಮದ ಫಲಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಚಿಂತಿಸುವುದನ್ನು ಬಿಟ್ಟುಬಿಡಿ. ಕಾರ್ಯಗಳ ಫಲಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಚಿಂತೆ ಮಾಡುವುದು ನಿರರ್ಥಕ ನಿಷ್ಕ್ರಿಯತೆಗೆ ಕಾರಣವಾಗುತ್ತದೆ, ಇದರಿಂದಾಗಿ ಸಮಯ ಮತ್ತು ಜೀವನ ಎರಡೂ ವ್ಯರ್ಥವಾಗುತ್ತದೆ.

 


श्लोक का सार सिंधी भाषा में:-ارجن جي ذريعي رب شري ڪرشنا سڀني انسانن کي سيکاريندو آهي ته اي! انسان توهان جي عملن ۾ صرف درست آهي. توهان ميوي بابت پريشان ٿيڻ نه گهرجي، اهو توهان جي سنڀال هيٺ نه آهي. توهان صرف ڪرما ڪري سگهو ٿا، تنهنڪري ڪرما جي ميون جي باري ۾ پريشان رکو. انهن عملن جي ميون جي باري ۾ بدقسمتي سان فضيلت پيدا ڪري ٿي، ڇاڪاڻ ته اهي ٻئي وقت ۽ زندگي ضايع ٿي ويندا آهن.

 

श्लोक का सार मलयालम भाषा में:-അർജ്ജുനനിലൂടെ ശ്രീകൃഷ്ണൻ മുഴുവൻ മനുഷ്യരെയും പഠിപ്പിക്കുന്നു. പ്രവൃത്തികൾ ചെയ്യുന്നതിൽ മാത്രമേ മനുഷ്യന് നിങ്ങളുടെ അവകാശം.ഫലത്തെക്കുറിച്ച് നിങ്ങൾ വിഷമിക്കേണ്ടതില്ല, അത് നിങ്ങളുടെ നിയന്ത്രണത്തിലല്ല. നിങ്ങൾക്ക് കർമ്മം മാത്രമേ ചെയ്യാൻ കഴിയൂ, അതിനാൽ കർമ്മത്തിന്റെ ഫലങ്ങളെക്കുറിച്ച് വേവലാതിപ്പെടുക. പ്രവൃത്തികളുടെ ഫലങ്ങളെക്കുറിച്ച് വേവലാതിപ്പെടുന്നത് നിരർത്ഥക നിഷ്‌ക്രിയത്വത്തിലേക്ക് നയിക്കുന്നു, ഇതുമൂലം സമയവും ജീവിതവും പാഴാകുന്നു.

 


श्लोक का सार बंगाली भाषा में:-অর্জুনের মধ্য দিয়ে ভগবান শ্রী কৃষ্ণ পুরো মানবজাতির শিক্ষা দিয়েছেন যে আরে! মানুষ কেবল কর্ম সম্পাদনে আপনার অধিকার You ফলের বিষয়ে আপনার চিন্তা করা উচিত নয়, এটি আপনার নিয়ন্ত্রণে নেই। আপনি কেবল কর্ম করতে পারেন, তাই কর্মফলের জন্য উদ্বেগ ছেড়ে দিন। কাজের ফল সম্পর্কে চিন্তিত নিরর্থক নিষ্ক্রিয়তার দিকে পরিচালিত করে, যার কারণে সময় এবং জীবন উভয়ই নষ্ট হয়।

 অতএব, আমাদের আমাদের কর্ম, 


श्लोक का सार गुजराती भाषा में:-ભગવાન શ્રી કૃષ્ણ અર્જુન દ્વારા આખી માનવજાતને શીખવે છે કે હે! માણસ ફક્ત કાર્યો કરવામાં તમારો અધિકાર છે તમારે ફળની ચિંતા ન કરવી જોઈએ, તે તમારા નિયંત્રણમાં નથી. તમે ફક્ત કર્મ જ કરી શકો છો, તેથી કર્મના ફળ વિશે ચિંતા કરવાનું છોડી દો. કર્મોના ફળ વિશે ચિંતા કરવાથી નિરર્થક નિષ્ક્રિયતા થાય છે, જેના કારણે સમય અને જીવન બંને વ્યર્થ થાય છે.

 તેથી, આપણે આપણા કાર્યો, ફરજો પર ધ્યાન કેન્દ્રિત કરવું જોઈએ.


श्लोक का सार मराठी भाषा में:-भगवान श्री कृष्ण अर्जुनच्या माध्यमातून संपूर्ण मानवजातीला हे शिकवतात की अहो! मनुष्य फक्त कर्मे करण्याचा आपला हक्क आहे आपण फळांची चिंता करू नये, ते आपल्या नियंत्रणाखाली नाही. आपण केवळ कर्म करू शकता, म्हणून कर्माच्या फळांची चिंता करणे सोडून द्या. कर्माच्या फळांबद्दल चिंता करणे निरर्थक निष्क्रियतेकडे वळते, ज्यामुळे वेळ आणि जीवन दोन्ही वाया जातात.

 


श्लोक का सार नेपाली भाषा में:-भगवान श्री कृष्ण अर्जुन मार्फत सम्पूर्ण मानिसजातिलाई सिकाउनुहुन्छ कि! मानिस मात्र काम गर्नमा तपाईको अधिकार हो। तपाईले फलको बारेमा चिन्ता लिनु हुँदैन, यो तपाईको नियन्त्रणमा छैन। तपाईं केवल कर्म गर्न सक्नुहुन्छ, त्यसैले कर्मको फलहरूको बारेमा चिन्ता गर्न छोड्नुहोस्। कर्महरूको फलको बारेमा चिन्ता गर्दा व्यर्थ निष्क्रियता हुन्छ, जसका कारण दुबै समय र जीवन बर्बाद हुन्छन्।

 तसर्थ, हामीले हाम्रो कार्यहरूमा, हाम्रो कर्तव्यहरूमा केन्द्रित हुनुपर्दछ।


श्लोक का सार पंजाबी भाषा में:-ਭਗਵਾਨ ਸ਼੍ਰੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਅਰਜਨ ਦੁਆਰਾ ਸਾਰੀ ਮਨੁੱਖਤਾ ਨੂੰ ਸਿਖਾਇਆ ਕਿ ਹੇ! ਮਨੁੱਖ ਕੇਵਲ ਕੰਮ ਕਰਨ ਵਿਚ ਤੁਹਾਡਾ ਅਧਿਕਾਰ ਹੈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫਲਾਂ ਦੀ ਚਿੰਤਾ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ, ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਨਿਯੰਤਰਣ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਹੈ. ਤੁਸੀਂ ਕੇਵਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਲਈ ਕਰਮ ਦੇ ਫਲ ਬਾਰੇ ਚਿੰਤਾ ਛੱਡ ਦਿਓ. ਕਰਮਾਂ ਦੇ ਫਲ ਬਾਰੇ ਚਿੰਤਾ ਕਰਨਾ ਵਿਅਰਥ ਗੈਰ-ਰਸਮੀਤਾ ਵੱਲ ਲੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਸਮਾਂ ਅਤੇ ਜੀਵਨ ਦੋਵੇਂ ਬਰਬਾਦ ਹੁੰਦੇ ਹਨ.

 


श्लोक का सार सिंहल भाषा में:-අර්ජුන හරහා ශ්‍රී ක්‍රිෂ්ණා දෙවියන් මුළු මිනිස් සංහතියටම උගන්වයි ඒයි! මිනිසා ඔබේ අයිතිය වන්නේ ක්‍රියාවන් කිරීම පමණි.ඔබ fruit ල ගැන කරදර නොවිය යුතුය, එය ඔබගේ පාලනය යටතේ නැත. ඔබට කළ හැක්කේ කර්මය පමණි, එබැවින් කර්මයේ fruits ල ගැන කරදර වීම අත්හරින්න. ක්‍රියාවන්ගේ fruits ල ගැන කරදර වීම නිෂ් le ල අක්‍රියතාවයට හේතු වන අතර එම නිසා කාලය හා ජීවිතය යන දෙකම නාස්ති වේ.

 එබැවින් අපගේ ක්‍රියාවන්, අපගේ යුතුකම් පිළිබඳව අවධානය යොමු කළ යුතුය.



यहाँ हमने भारत या भारत से जुड़े हुए भूभागों में प्रचलित पंद्रह प्रमुख भाषाओं में हमने गीता के कर्म-सिद्धान्त के इस महत्वपूर्ण श्लोक को समझने का प्रयास किया।

इति!

-अमन मिश्रा


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