बारिश
वो बारिश की बूंदे और उन बूंदों मे भीगा मेरा अंगना।
वो कागज की किश्ती लिए बच्चे और हमारा बूंदों की ताल पर थिरकना।
मानो कल की ही बात थी जब बारिश एक त्योहार लगता था और सावन प्यार की बरसात लगता था।
चलो आज फिर से झूमते है पकोड़ो को बनाने के बहाने ढूंढते है।
Paperwiff
by akshitashukla